कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| कान्हा | कोमल | 3 | |
| सार्या जातींना खड्यात जावूद्या | पाषाणभेद | 5 | |
| तुला कसली रे एवढी घाई ? | विश्वेश | 5 | |
| माझे आजुसचा नंगोट | आगरी बाणा | 8 | |
| पुन्हा एकदा वर्जेश सोळंकी | मुक्तसुनीत | 12 | |
| ते अलवार नाजूक,तरल क्षण.... !! | प्रकाश१११ | 6 | |
| मैत्री... | कोमल | 8 | |
| घुबडाच्या मागे लागले कावळे हजार ...!! | प्रकाश१११ | 3 | |
| तरीही लिहा.. | फ्रॅक्चर बंड्या | 6 | |
| ' सुखाचा ठेवा -' | विदेश | 5 | |
| एक घर विकत घ्यायचे आहे ..!! | प्रकाश१११ | 5 | |
| मुक्तता | अभिषेक९ | 1 | |
| ... निरंतर ... | अभिषेक९ | 2 | |
| अमेरीकन भ्रमनिरास | गणेशा | 19 | |
| <परततीचाच प्रवास> | विजुभाऊ | 4 | |
| किती दिवस झाले माहेराला गेले नाही | पाषाणभेद | 6 | |
| याहो याहो पाव्हणं तुम्ही | पाषाणभेद | 1 | |
| जरी वाटेल माझे बोलणे (गझल) | अजय जोशी | 9 | |
| एकच प्याला आज रिता झाला-भाग ४ | मनराव | 2 | |
| परतीचा प्रवास ...!! | प्रकाश१११ | 8 |