कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| ... स्मरण असावे (गझल) | अजय जोशी | 6 | |
| प्रतीक्षा | नगरीनिरंजन | 12 | |
| जीव गुंतला .. ( चाल खेळ मांडला) | गणेशा | 1 | |
| आई..मिटलेला श्वास - १ | गणेशा | 11 | |
| युगलगीतः तू माझी हो काठी, मी तुझी काठी | पाषाणभेद | 2 | |
| गोलात goल | पाषाणभेद | 7 | |
| राप्चिक र्राप्चिक कूल कूल | चन्द्रशेखर गोखले | 12 | |
| तो आणि त्याची स्वप्नं | पुष्कर | 2 | |
| क्षण.. | अथांग | 3 | |
| अजून काय... | असुर | 12 | |
| आज या कातरवेळी तिची आठवण का होतेय? | स्वप्निल मन | 5 | |
| नाते तुझे नि माझे ना सापडे अताशा | स्वानंद मारुलकर | 13 | |
| सरकारी योजना | पाषाणभेद | 3 | |
| युगलगीतः बाई इथंच ठोकू का हा खिळा? | पाषाणभेद | 9 | |
| एका सैनिकाने लिहिलेल्या हृदयद्रावक कवितेचे भाषांतर | गणेशा | 9 | |
| गहिवरल्या अधीर धारा ... | गणेशा | 1 | |
| चर्पटपंजरिका स्तोत्राचा भावानुवाद | राघव | 30 | |
| युगलगीत: रुसली ग रुसली, माझी बायको रुसली | पाषाणभेद | 4 | |
| टीन एज वारे वाहू लागलंय ! | अथांग | 3 | |
| (गावात प्लेग) | अर्धवट | 14 |