कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| ती | कुसुमिता१२३ | 11 | |
| भक्तीगीतः गणपती त्यांच्या घरी गेले | पाषाणभेद | 0 | |
| Conditions apply .... | विशाल कुलकर्णी | 8 | |
| विडंबन परिपूर्ती करा | योगप्रभू | 24 | |
| अनंत..... | स्पंदना | 4 | |
| लावणी: राहून जा की आजच्या रातीला | पाषाणभेद | 5 | |
| मुंबई | अथांग | 8 | |
| गझल | यशोधरा | 47 | |
| हिशेबाची माय मेली? | गंगाधर मुटे | 3 | |
| सल्ल्यासाठी विजूभाऊनी, इथ फोडिला टाहो, | केशवसुमार | 50 | |
| लाटा | राजेश घासकडवी | 18 | |
| माऊलीच माझ्या शेतात भजन गाई | पाषाणभेद | 2 | |
| (पाल बोले सरडीला ) | अडगळ | 22 | |
| DINK चा नको डंका | वन्दना धर्माधिकारी | 8 | |
| (गं बाई करू मी रांधप कुणीकडे) | मेघवेडा | 29 | |
| (भुंक न कुतऱ्या) | ३_१४ विक्षिप्त अदिती | 36 | |
| (तथास्तु !!) | चेतन | 10 | |
| फ्लॅंडर्सची फुलं (भावानुवाद) | राजेश घासकडवी | 34 | |
| हे मृत्यो तू काय करी | शुचि | 15 | |
| पाऊस.. | अथांग | 1 |