कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| जोवरी आहे जीव, तोवरी घ्या रामराम | पाषाणभेद | 0 | |
| गौळण: अरे कान्हा तू मजला असा छेडू नको | पाषाणभेद | 0 | |
| भसभसून उसळे नरड्यामधुनी धार | शहराजाद | 27 | |
| हडळ जागी भूत जागे | केशवसुमार | 41 | |
| ... | प्रियाली | 85 | |
| आता काही देणे घेणे उरले नाही | गंगाधर मुटे | 5 | |
| सुसाट..... नादखुळे विनोद..!! | Arun Powar | 19 | |
| तुझं माझं घर... | जयवी | 15 | |
| नेट नेटकं | चन्द्रशेखर गोखले | 15 | |
| प्रतिष्ठा | स्पंदना | 5 | |
| (सोसुनी सोसास या आक्रोश माझा वेगळा) | राजेश घासकडवी | 2 | |
| युगलगीतः मी सिता अन तुमी माझं राम | पाषाणभेद | 3 | |
| अमुच्यावरच्या धाग्यासंगे युद्ध आमुचे सरू | केशवसुमार | 32 | |
| <<विंडबकांच्या 'फळ'प्राप्तीसाठी युद्ध आमुचे सुरू >> | सुहास.. | 8 | |
| (फुटकळ गळक्या कौलांसंगे युद्ध आमुचे सुरू) | राजेश घासकडवी | 11 | |
| महागाईगीत: कसली भाजी करू मी आज | पाषाणभेद | 5 | |
| नाट्यगीतः सोडा हातातल्या हाता नाथा आता | पाषाणभेद | 6 | |
| कव्वाली : आता कोठे, मी कोठे तू? दुर निघुनी गेलो | पाषाणभेद | 1 | |
| (चौकट) | बेसनलाडू | 21 | |
| कै. नारायण सुर्वे यांची "मुंबई" हि कविता मला हवी आहे. | विशाल कुलकर्णी | 3 |