कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| ठेवू अम्ही विश्वास | पॅपिलॉन | 5 | |
| फ्लँडर्साच्या रणामध्ये | धनंजय | 22 | |
| मी | प्रीत-मोहर | 5 | |
| स्व प्न भं ग - | विदेश | 4 | |
| तथास्तु !! | अनुप्रिया | 8 | |
| होईल कधी गे भेट ? | स्वानंद मारुलकर | 5 | |
| गुड बाय !!! | अनुप्रिया | 4 | |
| सख्या... | अथांग | 6 | |
| उन्हाळी दुपार... | वैभव देशमुख | 4 | |
| माहीत नव्हतं... | अथांग | 4 | |
| फसू नका तुम्ही फसू नका | पाषाणभेद | 2 | |
| माझ्या झोपेची झाली आता येळ | पाषाणभेद | 0 | |
| शेतकरी गीत: शेतात जायाची माझी झाली आता येळ | पाषाणभेद | 4 | |
| कधीपासून ? | अथांग | 7 | |
| आभाळ लागले मिळू | स्वानंद मारुलकर | 5 | |
| हवी कशाला मग तलवार ? | गंगाधर मुटे | 2 | |
| जुना जमाना गेला आता नवा जमाना आला | पाषाणभेद | 0 | |
| कसं सांगू मी तुला, | अमोल मेंढे | 3 | |
| बर्याच दिवसांनी तिचा फोन आला | स्वप्निल मन | 2 | |
| गणपतीची आरती | गंगाधर मुटे | 16 |