कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| पोरखेळ ! | संदीप चित्रे | 12 | |
| सार काही क्षम्य असतं | विजुभाऊ | 26 | |
| नेहमीच धडकी भरते...! | बेसनलाडू | 5 | |
| चारोळ्या | यशोधरा | 15 | |
| लग्न | आनंदयात्री | 19 | |
| एका तळ्यात होते.... | अरुण मनोहर | 9 | |
| पण काहितरी बदलतयं... | मनिष | 17 | |
| (पीस) | केशवसुमार | 10 | |
| आता काय करायच॑ ? | पिस्तुल्या | 0 | |
| मनाचिया अंगणात..... | उदय सप्रे | 3 | |
| काही चित्र चारोळ्या | फटू | 16 | |
| जीवघेणे-२ | केशवसुमार | 5 | |
| फक्त ती सुखात राहायला हवी... | फटू | 9 | |
| तगमग | ॐकार | 9 | |
| (जीवघेणे!) | चतुरंग | 1 | |
| वाघाची मावशी | निनाद | 6 | |
| कट्टा | अरुण मनोहर | 5 | |
| कवितेचा एक प्रयोग | रामदास | 21 | |
| अबोला | शितल | 11 | |
| मधुशाला - एक मुक्तचिंतन आणि भावानुवाद (भाग ८) | चतुरंग | 10 |