कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| सोडुनी गेलास जिथे.... | शा॑तेच कारट | 7 | |
| पकलो आता, फार झाला | चेतन | 2 | |
| पुन्हा आसपास | आंबोळी | 14 | |
| माणसं अशी का वागतात? | चतुरंग | 19 | |
| सेल मांडीयेला | अरुण मनोहर | 14 | |
| (आसपास) | चतुरंग | 5 | |
| आसपास | सन्जोप राव | 54 | |
| स्वप्नपरी | पुष्कराज | 7 | |
| गुलाबाचे काटे | पुष्कराज | 2 | |
| भासा सूद्धी | विजुभाऊ | 25 | |
| (नको) | चतुरंग | 3 | |
| सहज | चेतन | 9 | |
| गुलाबाचा सण | पुष्कराज | 6 | |
| हिमेश बाबाच्या सौजन्याने... | फटू | 4 | |
| शिवमानसपूजा - आदि शंकराचार्य! | चतुरंग | 16 | |
| (........आकाशाशी जडले नाते !!) | अमोल केळकर | 5 | |
| देवा......एवढी दया नको रे दाखवू... | सागर | 10 | |
| "थेंब" | चेतन | 6 | |
| संपत असताना सारं काही... | फटू | 7 | |
| (उभी भिंत डागाळलेली मुळाशी) | चतुरंग | 8 |