कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| रंगलेल्या कबुतरांची गाठ पडली त्या वळूशी | चतुरंग | 10 | |
| भारुड-२ | विनायक प्रभू | 15 | |
| (अंमळ) | केशवसुमार | 5 | |
| चारोळी | जयेश माधव | 13 | |
| भारनियमन.. | उपटसुंभ | 7 | |
| मला इश्वर दिसतो आहे ! | चन्द्रशेखर गोखले | 0 | |
| मराठी गाण्यांच्या एम पी ३ हव्या आहेत.... | सागर | 40 | |
| माझी पाखरे माझे पक्षी दूर उडून गेले | पुष्कराज | 6 | |
| सूर्यास्त | जयवी | 7 | |
| ओढ | कौतुक शिरोडकर | 0 | |
| तहान | सागरलहरी | 0 | |
| घनगंध | सागरलहरी | 2 | |
| तुझा सूर्य मला उसना दे ! | सागरलहरी | 0 | |
| अंतीच्या कळान्चे | जिवाला लागीर | | सागरलहरी | 0 | |
| श्री शिवस्तुती | पुष्कराज | 10 | |
| निराकारी रंगारी | तिमा | 0 | |
| शेवटची रात्र ! | विशाल कुलकर्णी | 0 | |
| ( मी लिहिल्यावर पळुनी जातील -- ) | अमोल केळकर | 9 | |
| कशी कोण जाणे | कौतुक शिरोडकर | 1 | |
| (काव्यप्रसववेदना) | अनामिक | 5 |