कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| <सत्यध्वनी> | ३_१४ विक्षिप्त अदिती | 13 | |
| (नारदमुनी) | लिखाळ | 21 | |
| ज्याचं त्याचं आभाळ | क्रान्ति | 9 | |
| सामुद्रधुनी | शरदिनी | 18 | |
| (तगमग) | चतुरंग | 13 | |
| तगमग | शरदिनी | 20 | |
| कधी येणारगं तू सखये | अडाणि | 1 | |
| लेक होती घरामध्ये-- | पुष्कराज | 13 | |
| मी जगतो आहे | चन्द्रशेखर गोखले | 11 | |
| मी | क्रान्ति | 3 | |
| बिन्धास प्या! | सहज | 16 | |
| बिन्धास भ्या !!!! | चन्द्रशेखर गोखले | 17 | |
| क्षण | जागु | 4 | |
| तू घरात नसताना ... | अडाणि | 7 | |
| मातिच्या मुंग्या | अडाणि | 7 | |
| भूल | बेसनलाडू | 13 | |
| (बोल) | बेसनलाडू | 1 | |
| (पाहिजे वीकांत मोठा) | बेसनलाडू | 11 | |
| प्रवास | क्रान्ति | 2 | |
| पाहिजे एकांत थोडा-- | पुष्कराज | 5 |