कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| काव्यप्रसववेदना | आपला अभिजित | 4 | |
| आतुर | विशाल कुलकर्णी | 1 | |
| वेणू | कौतुक शिरोडकर | 1 | |
| ते पण एक वय असतं | ashwin joshi | 4 | |
| मागवेन व्हिस्की, मागवेन ब्रॅंडी..! | उपटसुंभ | 6 | |
| पहाट | पद्मश्री चित्रे | 13 | |
| महाराज.., शिवछत्रपती अवतरले त्राते | | सागरलहरी | 8 | |
| मी गेल्यावर वि़झुनी जातील-- | पुष्कराज | 12 | |
| राधा ही बावरी | विशाल कुलकर्णी | 2 | |
| तु म्हणजे.... | बाप्पा | 6 | |
| तो बेत कालचा मुळीच ठरला नव्हता | केशवसुमार | 5 | |
| (आड गल्लीतल्या काही कविता) | चतुरंग | 17 | |
| अडगळीतल्या काही कविता. | रामदास | 17 | |
| मी कोण ...... | चिंतामणराव | 0 | |
| क्षण | झेल्या | 0 | |
| te pan ek vay asta | ashwin joshi | 12 | |
| श्रावण शृंगार (गझल) | संदीप चित्रे | 12 | |
| तिची रुणूझुणू चाल--- | पुष्कराज | 2 | |
| सावर ग स्वतःला ..... | मितालि | 7 | |
| आई | ज्याक ऑफ ऑल | 3 |