कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| घेतली मिठीत आम्ही | पुष्कराज | 2 | |
| अ | पुष्कराज | 0 | |
| कोणास ठाऊक कसा पण्...विडंबनात उतरला पिडा... | शितल | 7 | |
| मी बोचले म्हणालो | केशवसुमार | 5 | |
| कधी असे ... | मनीषा | 10 | |
| तो चावला मघाशी ह्यांना अशा ठिकाणी | बेसनलाडू | 18 | |
| असा ही एक भावानुवाद "हो ना गं आई" | श्रीकृष्ण सामंत | 13 | |
| तुझे सब है पता... चा भावानुवाद | आचरट कार्टा | 10 | |
| रासलीला | पुष्कराज | 3 | |
| पण तू मात्र - 2 | sanjubaba | 6 | |
| बाम | केशवसुमार | 6 | |
| <प्रवाह....आणि उत्तर> | पिवळा डांबिस | 10 | |
| ((प्रवाह..आणि उत्तर)) | चतुरंग | 18 | |
| प्रवाह..आणि उत्तर | प्राजु | 39 | |
| आलो शरण तुला... | अंकुश चव्हाण | 1 | |
| बिकट सकाळ | केशवसुमार | 9 | |
| (चिकट सकाळ) | बिपिन कार्यकर्ते | 24 | |
| लावणी-प्रणयरातीला कुठ चालला | पुष्कराज | 0 | |
| सोबतीला पाव आहे | केशवसुमार | 18 | |
| म्हणजे-२ | केशवसुमार | 13 |