कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| मृगजळ | सचिन | 1 | |
| तू | सचिन | 1 | |
| मन कसे वेडे-पिसे | पल्लवी | 21 | |
| गुलाबाचे काटे | पुष्कराज | 1 | |
| साद | सुचेता | 8 | |
| आताही प्रेम तसेच आहे का? | धनंजय | 26 | |
| Seezens (seasons) | चतुरंग | 35 | |
| एकमन | सुचेता | 1 | |
| लाजवंती | संदीप चित्रे | 7 | |
| (ही 'तिची' माझीच आहे गोष्ट अन...) | चतुरंग | 8 | |
| चारोळ्या | मानसी मनोजजोशी | 1 | |
| चारोळ्या | मानसी मनोजजोशी | 13 | |
| इच्छिला उषःकाल अंधःकार मिळाला | श्रीकृष्ण सामंत | 2 | |
| ही तशी माझीच आहे गोष्ट पण... | घाटावरचे भट | 14 | |
| हे तसे माझेच आहे काव्य पण.. | केशवसुमार | 7 | |
| ही तुझी माझीच आहे गोष्ट पण... | अनिरुद्ध अभ्यंकर | 14 | |
| जय जय भारत ! जय जय भारत ! | आचरट कार्टा | 4 | |
| भारत माझा एक रॆ | राजा | 2 | |
| गुलबचा सण | पुष्कराज | 6 | |
| किती मैत्रिणी? ताटावरती ... | केशवसुमार | 13 |