कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| त्रिवेणींची वेणी | बेसनलाडू | 26 | |
| (भलताच जाच!) | चतुरंग | 13 | |
| बिघडलीये काच! | नीधप | 29 | |
| ...हमने इश्क किया है.(१) | रामदास | 11 | |
| चिंतन | चन्द्रशेखर गोखले | 4 | |
| पास ऑन | ब्रिटिश | 40 | |
| फक्त तुझ्यातच | द्विज | 2 | |
| तुझ्यासवे पुन्हा नवा जन्म घेतो... | विजुभाऊ | 12 | |
| वेळ | अनिरुध्द | 6 | |
| (अशीही एक) कोजागिरी | बेसनलाडू | 11 | |
| प्रिय कोकिळा | शर्मीला | 2 | |
| नशीब | दत्ता काळे | 3 | |
| दुपारच्या कविता. | रामदास | 23 | |
| मला मुम्बईत रहायचय..........!!!!!!!!! | नुसताधिन्गाना | 4 | |
| हिच जगाची रीत असावी | शर्मीला | 2 | |
| जीवन म्हणजे नक्की काय असतं ? | शर्मीला | 7 | |
| विडंबन : सफरचंद | मी असाकसा वेगळा वेगळा | 7 | |
| (कोलाज) | चतुरंग | 0 | |
| गंधविभोर | दत्ता काळे | 7 | |
| एक फक्कड लावणी | शशिकांत ओक | 5 |