कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| अळकुळी तनु | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| नको म्हणू रे मनुजा! | श्रीकृष्ण सामंत | 4 | |
| संता आणी बंता | अमोल केळकर | 1 | |
| जखम मनाची ताजी असता | श्रीकृष्ण सामंत | 2 | |
| तुझी याद.. | पद्मश्री चित्रे | 7 | |
| नभी चांदणे...(गझल) | पद्मश्री चित्रे | 14 | |
| तत्व माझे सोडणार नाही | श्रीकृष्ण सामंत | 5 | |
| तारीफ करू का त्याची | श्रीकृष्ण सामंत | 7 | |
| तो आणि त्याचा 'मी' | काळा_पहाड | 3 | |
| धमुचे केळवण (जेव्हा पुरी नि भाजी - ) | अमोल केळकर | 2 | |
| लग्नाआधी नि लग्नानंतर ! | संदीप चित्रे | 3 | |
| आता कशाला उद्दयाची बात | श्रीकृष्ण सामंत | 9 | |
| काय करावे कळत नव्हते | कौस्तुभ | 6 | |
| शादी से पहले और शादी के बाद ! | संदीप चित्रे | 8 | |
| परि तुज सम आहेस तूच | श्रीकृष्ण सामंत | 10 | |
| (सख्या रे, घामट मी तरुणी!) | चतुरंग | 14 | |
| उघड्या खांद्यावरती सखये-- | पुष्कराज | 12 | |
| अरे संस्कार,संस्कार | श्रीकृष्ण सामंत | 7 | |
| जिवलगा... | फटू | 3 | |
| उद्धवा! अजब तुझे सरकार | श्रीकृष्ण सामंत | 0 |