कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| विवाहाची पद्यातली आमंत्रण पत्रिका | उदय सप्रे | 1 | |
| सारखे शिंकीत जाशी ... | केशवसुमार | 10 | |
| TAROT भविष्याची चाहुल घेणे | अमोल केळकर | 11 | |
| आयुष्यावर प्रेम करावे-- | पुष्कराज | 7 | |
| अशी गुमसुम आवडतेस मला | धनंजय | 10 | |
| द्विधा मनाचि | namdev narkar | 0 | |
| पावसा! | ऋषिकेश | 13 | |
| सोने | सुवर्णमयी | 7 | |
| माझी कविता | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | 21 | |
| मैत्री | अनंतसागर | 7 | |
| kai aahe tuzya manat........???? | स्नेहश्री | 0 | |
| कुणास ठाऊक..? | स्नेहश्री | 4 | |
| पाहिले मी ! | कौस्तुभ | 11 | |
| विराणी | यशोधरा | 12 | |
| इज्जत | श्रीकृष्ण सामंत | 2 | |
| घेतली मिठीत आम्ही--- | पुष्कराज | 6 | |
| (स्वप्न) | केशवसुमार | 13 | |
| स्वप्न | धोंडोपंत | 28 | |
| (छंदात छंद तो प्रवासछंद --) | अमोल केळकर | 0 | |
| मिपावर लिहीणं धोक्याचं! | पिवळा डांबिस | 36 |