कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| आली फिरून उत्कंठा जगण्याची | श्रीकृष्ण सामंत | 2 | |
| आईच्या कविता-१ | दिनेश५७ | 9 | |
| प्रेमात... | truptiparte | 0 | |
| उघडी पाठ | केशवसुमार | 10 | |
| (मोरपिशी साडी) | बेसनलाडू | 7 | |
| शेपटा | ANIRUDDHA JOSHI | 6 | |
| हिरवी जिद्द | स्वाती फडणीस | 7 | |
| (लाडू सांगे...) | बेसनलाडू | 12 | |
| ( कंदील ) | अमोल केळकर | 9 | |
| बिग बी | केशवसुमार | 19 | |
| (सिनेमातल्या हिरोंची पूर्वी भरली सभा) | अमोल केळकर | 23 | |
| दे दे गं! सजणी आधार तुझ्या हाताचे | श्रीकृष्ण सामंत | 4 | |
| अद्दल | केशवसुमार | 13 | |
| विडंबक | कोलबेर | 11 | |
| विठू सांगे... | प्राजु | 49 | |
| तर हे अस आहे आभासी जग तुमच...!!!! | आंबोळी | 13 | |
| "सहवास" | मनीषा | 8 | |
| वात्रटिका | शेखर | 1 | |
| तर हे अस आहे कॉरपोरेट जग तुमच...!!!! | स्नेहश्री | 5 | |
| ((बैल)) | आंबोळी | 20 |