कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| (एक पेग संपून गेला..) | केसुरंगा | 6 | |
| ((नेहेमीच...तुझ्यामुळे)) | चतुरंग | 6 | |
| आला आला हा श्रावण... | अथांग सागर | 0 | |
| )) नेहमीच ... तुझ्यामुळे (( | बिनडोक बनी | 11 | |
| एक क्षण निसटू गेला.. | स्वाती फडणीस | 10 | |
| (नेहमीच ... तुझ्यामुळे) | केशवटुकार | 18 | |
| नेहमीच ... तुझ्यामुळे | बेसनलाडू | 17 | |
| ||ओम नमः शिवाय || | मृगनयनी | 39 | |
| (नूर) | चतुरंग | 8 | |
| बंधने | स्नेहश्री | 0 | |
| श्रावणमासी, विरस मानसी,हळहळ दाटे चोहिकडे | अविनाश ओगले | 13 | |
| खरचं तु हवी होतीस .. | पंचम | 8 | |
| जागतिक मैत्री दिनाच्या शुभेच्छा !!! | फटू | 2 | |
| अस्तित्व | पेशवे बाजीराव तिसरे | 1 | |
| (सारक) | केसुरंगा | 6 | |
| सहजीवन | शितल | 11 | |
| जीवनगाणे | घाटावरचे भट | 16 | |
| रिता गाभारा ..... | मनीषा | 8 | |
| विरह | ल्ल्या | 0 | |
| कविता कसली करू तुजवरती | श्रीकृष्ण सामंत | 0 |