कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| (पहा वेळ झाली!) | चतुरंग | 2 | |
| वस्ति वसविली मी अगदी जगावेगळी | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| प्रतिबिंब | पद्मश्री चित्रे | 13 | |
| मौनाला फुटली वाणी!.. | स्वाती फडणीस | 3 | |
| वादळ आता माणसाळतंय...... | मनीषा | 5 | |
| तिन्ही त्रिकाळ | अरुण मनोहर | 5 | |
| चमचम करती ऐने | स्वांतसुखाय | 0 | |
| आहे आणि नाही असा! | स्वाती फडणीस | 5 | |
| दिवस असे की ढोणी खेळत नाही, अन अनिल चालत नाही..! | उपटसुंभ | 10 | |
| आज १५ ऑगस्ट ना..! | उपटसुंभ | 2 | |
| ('माथा' फिरे कुणाचा __ ) | अमोल केळकर | 0 | |
| अंतर थोडेसे | अरुण मनोहर | 0 | |
| मिसळपावार आमचे लेखनाचे शतक | श्रीकृष्ण सामंत | 20 | |
| तुटू न जावो तुझी कंगणी | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| (१६ ऑगस्ट.) | केशवटुकार | 7 | |
| १६ ऑगस्ट. | रामदास | 14 | |
| तांडव.. | प्राजु | 12 | |
| स्वातंत्र्यदिनाची ही कविता लवकरात लवकर शिळी होवो... | अविनाश ओगले | 13 | |
| स्वातंत्र्य तर मिळाले, पण...?? | निमिष सोनार | 1 | |
| मनातला पाऊस | prasannakumar | 1 |