कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| आत्मक्लेश | नंदकिशोर साळ्वे | 1 | |
| मराठी भाषा एक चिरन्तन जीवनप्रवाह | अनिरुद्धशेटे | 9 | |
| खेळ दोन ओळींचा - १ | राघव | 43 | |
| तुझ्या माझ्यासवे कधी गायचा दाऊदही...! | उपटसुंभ | 5 | |
| जाम कोणी देइ | धनंजय | 19 | |
| मधुशाला - एक मुक्तचिंतन आणि भावानुवाद (भाग १०) | चतुरंग | 14 | |
| नाच नाच मोरा.. | स्वाती फडणीस | 5 | |
| एका सुन्दर मुलीसाठी | अनिरुद्धशेटे | 4 | |
| काही माणसं | ग्रीष्म | 9 | |
| काटा रुते कुणाला | अरुण मनोहर | 3 | |
| समस्यापूर्ती | रामदास | 5 | |
| (टाळतो) | चतुरंग | 8 | |
| ते आणि आम्ही | अजय जोशी | 1 | |
| निकामी | पद्मश्री चित्रे | 12 | |
| तू अशी स्वप्नात माझ्या | अमोल केळकर | 0 | |
| पटकन एक छोटीशी | मुक्तसुनीत | 21 | |
| वाटले की शेवटी होकार झाला | धनंजय | 20 | |
| मराठीतील अजरामर गीतांचा इतर भाषिकांनाही आस्वाद घेता यावा म्हणून हा प्रयत्न... | बहुगुणी | 4 | |
| एक शृंगारीक कविता | रामदास | 44 | |
| बिहारी कणा .. (कुसुमाग्रजांची क्षमा मागून) | उपटसुंभ | 6 |