कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| राधा | पद्मश्री चित्रे | 20 | |
| एका (पेक्षा एक) कवीं चे मनोगत----! | मनीषा | 4 | |
| (...बोकडाचे खूर काही!) | चतुरंग | 9 | |
| वाढदिवस म्हणजे | दिप्ती | 2 | |
| तेंव्हा एक कर! (विडंबन) | दिप्ती | 3 | |
| एक छोटी कविता (तक्रारवजा) | पांथस्थ | 13 | |
| एक सुरवात व शेवट नसलेली कविता | दत्ता काळे | 2 | |
| कळी संगे निर्दय भोंवरा मधूर गुंजन करतो कसे? | श्रीकृष्ण सामंत | 2 | |
| ओंडका | स्वाती फडणीस | 5 | |
| विराणी | यशोधरा | 20 | |
| प्रेमे नादली पंढरी..! | राघव | 13 | |
| आमची ही-"मुंबई" | पद्मश्री चित्रे | 7 | |
| आमची मुंबई | वृषाली | 5 | |
| सप्तर्षि | सौरभ वैशंपायन | 10 | |
| फांसे | हेरंब | 1 | |
| भास | अनिरुद्ध अभ्यंकर | 42 | |
| मातृदिनाच्या निमित्ताने | पद्मश्री चित्रे | 13 | |
| (लावू कशी पाटी मी दुकानला हो ) | अमोल केळकर | 0 | |
| छायाचित्र क्र. ४ चे परिक्षण | ऋषिकेश | 6 | |
| भातुकलीच्या खेळामधले, राजा आणिक राणी..... | मृगनयनी | 6 |