कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| पावसाची परी | अरुण मनोहर | 1 | |
| नाव शोधून शोधून जोडू नको! | केसुरंगा | 8 | |
| (कहर) | चतुरंग | 11 | |
| आवाहन | राघव | 8 | |
| दृष्टी | अरुण मनोहर | 3 | |
| (काळाची गरज) | केशवटुकार | 20 | |
| झुरणी - लेखणी | हर्षद आनंदी | 3 | |
| काळाची गरज | हर्षद आनंदी | 9 | |
| दुःखामधे सुख लपलेले असते साजणा रे! | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| (पेताडांच्या मेळ्यामध्ये !) | संदीप चित्रे | 5 | |
| (एका मिसळीचे बिल भरलेच नाही !) | संदीप चित्रे | 2 | |
| बॅचलरांच्या मेळ्यामध्ये | बिनडोक बनी | 7 | |
| (वय साठावं लागलं की) | चतुरंग | 12 | |
| पाऊल नाद की विनाश वाटेवरील मृत्युगीत? | अरुण मनोहर | 8 | |
| पाऊस.. | पद्मश्री चित्रे | 10 | |
| आणि एक स्केच..... | उदय सप्रे | 5 | |
| वय सोळावं सरलं की..... | अनिरुद्ध अभ्यंकर | 19 | |
| पावसाळ्यातील एक दिवस | अजिंक्य | 4 | |
| पावनखिंड | घाटावरचे भट | 0 | |
| तुला खात्री आहे? | ऋषिकेश | 6 |