कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| धरणीचे मनोगत | वैभवदातार | 1 | |
| सध्या रोज संध्याकाळी येणार्या पावसावर मी केलेली कविता... | वैभवदातार | 5 | |
| मधुघट१ | चांदणे संदीप | 3 | |
| पावसामुळे काय काय | पाषाणभेद | 1 | |
| (कद्रूंना झोडा) | ज्ञानोबाचे पैजार | 6 | |
| चंद्राचा पाढा | बेसनलाडू | 13 | |
| सख्या, कसे? कुठून रोज, आणतोस चांदणे? | सत्यजित... | 29 | |
| भासं~फुलं! | अत्रुप्त आत्मा | 10 | |
| वासफुलं | Swapnaa | 4 | |
| मुंबईकर . . . . . | माम्लेदारचा पन्खा | 0 | |
| हे बहुरुपी | अनन्त्_यात्री | 2 | |
| बघ तुला जमतं का ... | चामुंडराय | 2 | |
| बघ तुला जमतं का ... | चामुंडराय | 0 | |
| पुष्कळ दूध शिल्लक आहे किंवा दिमाग का दही | दमामि | 32 | |
| आयुष्य आणि झरा ... | एकप्रवासी | 0 | |
| आरसा | प्रावि | 0 | |
| हरिहरि... | दिनेश५७ | 0 | |
| मन | दिनेश५७ | 0 | |
| देवीची शेजारती | वैभवदातार | 0 | |
| मी माझे तारांगण सादर करतो | drsunilahirrao | 3 |