कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| प्रेरणा वगैरे | चाणक्य | 3 | |
| ( पुन्हा नोटा ) | गबाळ्या | 0 | |
| भावगीत | वैभवदातार | 3 | |
| हिरवे सोने | चांदणशेला | 2 | |
| (नोटा) | ज्ञानोबाचे पैजार | 11 | |
| वाटा | पद्मश्री चित्रे | 11 | |
| ( काल रातीला सपान पडलं ) | गबाळ्या | 4 | |
| कवि बिल्हणाची 'चौरपंचाशिका' - एक शृंगाररसपूर्ण काव्य. | अरविंद कोल्हटकर | 22 | |
| (बघ जरा पोळीत माझ्या काय आहे….) | गबाळ्या | 5 | |
| || गुरु महिमा || | गबाळ्या | 25 | |
| एक कविता | रामदास | 4 | |
| (तिखले) | सूड | 4 | |
| नवा कवी | गबाळ्या | 1 | |
| व्यथा | वैभवदातार | 9 | |
| ||दत्त स्तुती || | वैभवदातार | 8 | |
| मोह | ज्योति अळवणी | 2 | |
| शंका/समाधान. | अविनाशकुलकर्णी | 0 | |
| कविराज | गबाळ्या | 2 | |
| (धुतले...) | टवाळ कार्टा | 12 | |
| चुकले... | अजब | 7 |