कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| स्वराज्याचे शिलेदार | खिलजि | 1 | |
| पुन्हा एक स्वातंत्र्यासाठी..!! | परशुराम सोंडगे | 2 | |
| मूठ / कर्ज | संदीप-लेले | 0 | |
| काही त्रिवेणी रचना... | राघव | 6 | |
| ॥ रमू नको या जगात ॥ | खिलजि | 4 | |
| लाज | विशाल कुलकर्णी | 11 | |
| <नाव सुचवा> | निशांत_खाडे | 0 | |
| पुण्याची मुंबई आता झाली की राव... | निमिष सोनार | 6 | |
| सोनरंग | चांदणशेला | 12 | |
| सुदाम्याचे पोहे | प्राची अश्विनी | 7 | |
| प्रपोज डे | अविनाशकुलकर्णी | 1 | |
| मी माझा | दिपोटी | 2 | |
| माणूस प्रगत झालाय? | फुंटी | 0 | |
| मुक्तपीठ | चुकार | 4 | |
| सर्वसामान्य आणि राजकारणी! | ज्योति अळवणी | 3 | |
| तुझी आठवण, साठवणींच्या कोंदणात अशीच पडून राहिली | खिलजि | 1 | |
| जसे छाटले मी मला येत गेले,धुमारे पुन्हा! | सत्यजित... | 10 | |
| माझे जगणे होते गाणे ( विडंबन ) | गोगट्यांचा समीर | 1 | |
| (हे कोहल्यांच्या विराटा) | दमामि | 4 | |
| डू-आयडीज् खूप दिसतात इथे, परतुनी येती "नाना"विध रूपे | चामुंडराय | 1 |