कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| लोक | शब्दानुज | 0 | |
| नजरेतच सारे.. | समयांत | 0 | |
| ||हुच्चभ्रूंची कैसी लक्षणे || | अनन्त्_यात्री | 34 | |
| || गीताबोध || | वैभवदातार | 4 | |
| एक कागद | गबाळ्या | 4 | |
| ते... | ऊध्दव गावंडे | 15 | |
| ती त्सुनामी... | अनन्त्_यात्री | 2 | |
| Foolपाखरा | ज्ञानोबाचे पैजार | 7 | |
| फुलपाखरा | मिसळलेला काव्यप्रेमी | 3 | |
| उठ मावळ्या ... | गबाळ्या | 4 | |
| आता फक्त घासफूस ... | गबाळ्या | 0 | |
| एक सल नेहमीच - भावानुवाद | चांदणे संदीप | 5 | |
| बघ जरा झोळीत माझ्या काय आहे…. | अनन्त्_यात्री | 5 | |
| जपमाळ | शैलेन्द्र | 32 | |
| ||संत ज्ञानेश्वर || | वैभवदातार | 1 | |
| चंद्रमण्यांचे पाझर | अनन्त्_यात्री | 9 | |
| अहेवपण ... | विशाल कुलकर्णी | 15 | |
| असतेस घरी तू जेव्हा...(विडंबन काव्य) | OBAMA80 | 3 | |
| #एकादशी # | सतिश गावडे | 10 | |
| !! बालदीन !! | नाखु | 5 |