कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| परतून ये तू घरी | गंगाधर मुटे | 20 | |
| जगणे...! | अत्रुप्त आत्मा | 35 | |
| खड्डारी | फुंटी | 2 | |
| ग टा री... | दिनेश५७ | 4 | |
| अस्वस्थामा... | दिनेश५७ | 9 | |
| विस्फोट | योगेश कोकरे | 5 | |
| जागली स्पंदने नवी नवी | रातराणी | 31 | |
| नाते | ज्योति अळवणी | 5 | |
| वात्रटिका - आजचा कवी | विवेकपटाईत | 4 | |
| वयम् अपि कवय:॥ | सूड | 47 | |
| झाकलेले सत्य | माहीराज | 3 | |
| ( मी बी पिरेम करीन म्हनतो ) : टपोरी तडका | नीलमोहर | 24 | |
| ( मी बी पिरेम करीन म्हनते ) : प्रेमळ तडका | नीलमोहर | 9 | |
| फिलिंग आवसमला | फुंटी | 26 | |
| रिमझिम रिमझिम | सुधीरन | 4 | |
| मी बी काय तरी लिहीन म्हणतो : औरंगाबाद तडका. ;) | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | 67 | |
| कवी हूँ मैं | स्वामी संकेतानंद | 12 | |
| शोभिवंत होळी | शब्दबम्बाळ | 6 | |
| तृप्ती | ज्योति अळवणी | 6 | |
| दोन मूठ राख | गंगाधर मुटे | 19 |