कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| वाट! | जव्हेरगंज | 7 | |
| पाऊस... | दिनेश५७ | 1 | |
| अश्याच एका पावसाळ्या रात्री ......... | एक एकटा एकटाच | 12 | |
| तुझ्या नकळत | अविनाशकुलकर्णी | 7 | |
| बंद पडलं.. | अत्रुप्त आत्मा | 41 | |
| ( एका पावसात सगळ्यानी अडकायचं ) | अमोल केळकर | 3 | |
| मनातले माइ्या | Bhagyashri satish vasane | 7 | |
| समाधान ! | खेडूत | 9 | |
| तुला देव कसं म्हणायचं? | वेल्लाभट | 6 | |
| मला ना तुझ्या प्रेमाचं गणितच कळत नाही, | जगप्रवासी | 23 | |
| सार्थक जन्म-समर्पण अर्थात नर्मदाख्यान लोककथा. | खुशि | 34 | |
| कविता | आ युष्कामी | 0 | |
| .मला मात्र पत्नी गोरी हवी.. | कानडाऊ योगेशु | 8 | |
| वाट पहात आहे..... | शिव कन्या | 2 | |
| ती आणि मी.... | एक एकटा एकटाच | 3 | |
| आळस | जव्हेरगंज | 2 | |
| राहून गेलेलं | पिशी अबोली | 34 | |
| तो नुसता ह्ंसायचा | तिमा | 19 | |
| भूतकाळ सुरु होतो... | अज्ञात | 1 | |
| मार्कर | ए ए वाघमारे | 3 |