कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| बायको कोण असते... | निओ | 4 | |
| < < मजबुरी है > > | ज्ञानोबाचे पैजार | 39 | |
| माझा गाव | निलम बुचडे | 9 | |
| तुझी वाट बघता बघता........ | एक एकटा एकटाच | 9 | |
| अनुवादः तू भेटतेस अशी. मूळ कविता: जरूरी है | मिसळलेला काव्यप्रेमी | 38 | |
| ..विचारेन त्यालाच कॉफी चहा.. | कानडाऊ योगेशु | 8 | |
| पहायचं होत ग तुला एक नजर...!!! | kunal lade | 0 | |
| एक पावसाळी कविता | पथिक | 15 | |
| आस | विशाल कुलकर्णी | 17 | |
| ..तेव्हा मला तू फार फार आवडतेस..प्रवास ४ | कानडाऊ योगेशु | 20 | |
| आखाजीना सन | पाषाणभेद | 2 | |
| आखाजीचा सण | पाषाणभेद | 13 | |
| समरस व्हावे ऐसे | चांदणे संदीप | 7 | |
| ....थांबले ट्राफीक आता... | कानडाऊ योगेशु | 3 | |
| माय | ऊध्दव गावंडे | 8 | |
| ..तुला पाहण्याचा मला छंद राणी.. | कानडाऊ योगेशु | 11 | |
| आधी सोसायचे ,मग हासायचे | पथिक | 2 | |
| फिरोज, आज तुझीच का आठवण व्हावी ? | माहितगार | 8 | |
| ..वॉन्टेड.. | कानडाऊ योगेशु | 15 | |
| एकट्याने रात हि पेलावी कशी | पथिक | 23 |