कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| भूक | अरुण मनोहर | 14 | |
| आता तरी देवा, | अनिल तापकीर | 2 | |
| प्रिय सचिन देवा..................... | मंदार कात्रे | 9 | |
| <<< सांभाळ गो बाय, उत्साहित कळ्यांना >>> | सुहास.. | 18 | |
| गाल चोळ फक्त | ज्ञानोबाचे पैजार | 12 | |
| पांडुरंग पांडुरंग | कौस्तुभ आपटे | 10 | |
| मेटामॉर्फिसीस | स्पंदना | 30 | |
| सांभाळ का म्हणावे, गालातल्या खळ्यांना | सांजसंध्या | 24 | |
| रात्र चांदणी | पाषाणभेद | 15 | |
| मित्र :) | रसायन | 7 | |
| शिव तांडव स्तोत्र - मराठी अनुवाद | नरेंद्र गोळे | 38 | |
| गाणे गात रहा | हारुन शेख | 78 | |
| एक ओळ फक्त.........! | Piyush mrudung | 66 | |
| मी काय करू??.......... | बटाटा चिवडा | 25 | |
| चारोळी: पाऊस प्रणय रात्र! | निमिष सोनार | 7 | |
| "शिवराय" | अनिल तापकीर | 18 | |
| बडवे | तिमा | 2 | |
| चारोळ्या-(स्वरचित) | रसायन | 19 | |
| शब्द - अर्थहीन | विश्वेश | 2 | |
| शोधू किती बहाणे... | सांजसंध्या | 31 |