कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| फराळ आणि फटाके : दिवाळीतले आणि जीवनातले! | निमिष सोनार | 1 | |
| देवाला रिटायर करण शक्य नाही | राजघराणं | 18 | |
| झक मारली आणी एन्जीनीअरिन्ग्ला आलो.................. | रणजीत देशमुख | 10 | |
| माझी शाळा | निश | 10 | |
| मनातलं सांगताच येईना..................... | खान | 19 | |
| कितीक दिवस हे | कौस्तुभ आपटे | 12 | |
| दारू फुकट झालीच पाहिजे... | अस्वस्थामा | 13 | |
| केव्हा तरी पहाटे... | एस | 2 | |
| <<मनातलं सांगताच येईना>> | प्रास | 22 | |
| चारोळी | कल्पी जोशी | 7 | |
| लक्ष लक्ष दिव्यांचा .............. | अनिल तापकीर | 0 | |
| मनातलं सांगताच येईना ... | जेनी... | 26 | |
| आणि अचानक त्या वेळी.. | ह भ प | 1 | |
| तडकलेली स्वप्न काच | कल्पी जोशी | 13 | |
| ऊन-सावली नाते अपुले | जयवी | 14 | |
| स्वार्थ.. | राघव | 8 | |
| मेरे हर लफ्ज मे छुपा हुआ तूफान है ! | वडापाव | 0 | |
| क्षण ते... | कौस्तुभ आपटे | 0 | |
| प्रेमाचा विडा | वडापाव | 21 | |
| असतेस घरी तू जेव्हा..... | माम्लेदारचा पन्खा | 11 |