कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| युगलगीत: ही धुंद पावसाळी हवा | पाषाणभेद | 9 | |
| कातरवेळ | दत्ता काळे | 7 | |
| दिसू लागले स्पष्ट जसे हे | केशवसुमार | 39 | |
| ..पाऊस मोठा अस्सा यावा.. | कानडाऊ योगेशु | 18 | |
| कषाय-दान | पुष्कर | 9 | |
| भस्म्या !! | स्पंदना | 36 | |
| गीत: कसं जगावं या असल्या दिवसात | पाषाणभेद | 2 | |
| तुझी जीन्स पॅन्ट | पाषाणभेद | 3 | |
| आणि अचानक..... | हर्षद आनंदी | 3 | |
| चार ओळी मनापासुन... | हर्षद आनंदी | 1 | |
| आंधळ्याच नशीब | शानबा५१२ | 0 | |
| बरे नाही | अरुण मनोहर | 5 | |
| पिकल्या आंब्याला | पाषाणभेद | 3 | |
| बजरंगाचा भक्त पैलवान | पाषाणभेद | 3 | |
| तुझ्या रूपातले राग | शैलेन्द्र | 1 | |
| नदीकाठी सासूरवाशीण | पाषाणभेद | 6 | |
| त्याचे तिचे प्रश्नोत्तरे | पाषाणभेद | 2 | |
| कळालं तेव्हा... | मराठमोळा | 4 | |
| पोवाडा मर्द मावळ्याचा | पाषाणभेद | 9 | |
| मॅकमामा मॅकमामा गेलास का ? | अडगळ | 8 |