कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| वाढदिवस | sur_nair | 17 | |
| नांदी | सन्जोप राव | 8 | |
| अबोल प्रीत | क्रान्ति | 8 | |
| ती चिडली तेव्हा भीषण | अरुण मनोहर | 11 | |
| कटोरी | केशवसुमार | 20 | |
| फांदी-२ | केशवसुमार | 16 | |
| मोहविते मज तव गंधीत कांती | पाषाणभेद | 4 | |
| “बुडीत खाते“ माझेहि ! ! | निरन्जन वहालेकर | 7 | |
| चंपूची जिंदगी | फटू | 9 | |
| वर्तूळ | पाषाणभेद | 2 | |
| (हावरे) | कानडाऊ योगेशु | 5 | |
| ज्वालामुखीचे कवन | पाषाणभेद | 2 | |
| दू s s s s र किनारा ! | निरन्जन वहालेकर | 1 | |
| भोवरे... | विशाल कुलकर्णी | 8 | |
| गाणे | अविनाशकुलकर्णी | 4 | |
| आई | पंचम | 6 | |
| जटील जटील जटील किती | अरुण मनोहर | 2 | |
| हळू हळू...चालव तुझी फटफटी | पाषाणभेद | 2 | |
| ..मैफिल.. | कानडाऊ योगेशु | 4 | |
| आज अचानक उदास का वाटे | पाषाणभेद | 10 |