कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| xxवी झाली तेंव्हा | सन्जोप राव | 18 | |
| यादवी किंवा (ती झाली तेव्हा...) | राजेश घासकडवी | 15 | |
| आरसा अथ ते इथी | झुम्बर | 4 | |
| ..उखाणे (काहीच्या बाही).. | कानडाऊ योगेशु | 24 | |
| जाऊन जराशी येते | sur_nair | 6 | |
| (फसलेला लेख) | चेतन | 12 | |
| स्पर्शून तारकांना.. | प्राजु | 24 | |
| !! चोराळ्या!! | आंबोळी | 6 | |
| असाच व्हावा शेवट माझा...... | झुम्बर | 15 | |
| “ चंद्र हवा मज “ ! ! ! | निरन्जन वहालेकर | 0 | |
| !! चारोळ्या !! | मराठमोळा | 4 | |
| दमलेले ढग | फ्रॅक्चर बंड्या | 10 | |
| समोर आता येते कशाला | पाषाणभेद | 0 | |
| आठवण | स्वप्निल मन | 1 | |
| (भक्ता! तू सुद्धा ???) | राजेश घासकडवी | 3 | |
| स्वामीं ! तुम्ही सुद्धा ? ? ? | निरन्जन वहालेकर | 1 | |
| तू असं यावस...... | स्पंदना | 5 | |
| शुद्ध दाद दे !! | बाळअमोघ | 5 | |
| युगलगित: रानातले खेळ जरा खेळू | पाषाणभेद | 0 | |
| लादेन म्हणतो चेपेन चेपेन.. | उपटसुंभ | 19 |