कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| प्रार्थना | स्पंदना | 3 | |
| (किनारा ) | चेतन | 0 | |
| तुझ्या रूपातले राग | क्रान्ति | 4 | |
| रातराणी ? ? ? अरे बाप रे ! ! ! | निरन्जन वहालेकर | 4 | |
| किनारा | आनंदयात्री | 25 | |
| <>आपलं कसं जमणार<> | परिकथेतील राजकुमार | 33 | |
| आपलं कसं जमणार? | विशाल कुलकर्णी | 13 | |
| सुखी माणसाचा सदरा….! | विशाल कुलकर्णी | 0 | |
| काय अपशकून घडला | पाषाणभेद | 2 | |
| युगलगीत: चल दुर दुर दुर दुर जावू (दोन आवृत्या) | पाषाणभेद | 0 | |
| केव्हा तरी ... | मनीषा | 12 | |
| सख्या हो दिलवरा तल्वार दुर धरा | पाषाणभेद | 9 | |
| शरदिनी | दशानन | 2 | |
| (न्हाउन ओले केस घेवून) | मनिष | 3 | |
| न्हाउन ओले केस घेवून | पाषाणभेद | 7 | |
| नकोस माझी आठवण काढू | पाषाणभेद | 0 | |
| (जखमी वाचकांची रिपु) | मराठमोळा | 6 | |
| विचारू नका..! (नवीन) | निरन्जन वहालेकर | 2 | |
| विश्वास | बाबुराव | 3 | |
| (चित्र) | केशवसुमार | 8 |