कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| (रूळ) | राजेश घासकडवी | 8 | |
| (धूळ) | प्रभो | 12 | |
| <चूळ> | शुचि | 11 | |
| (खूळ) | ३_१४ विक्षिप्त अदिती | 25 | |
| (गूळ) | चतुरंग | 18 | |
| रुळ | अवलिया | 23 | |
| युगलगीत : अलवार गुपित उमगले प्रितीचे | पाषाणभेद | 4 | |
| " स्वप्न" पहिला पाउस | निरन्जन वहालेकर | 6 | |
| गीत: कधी कधी खोटं बोलाया लागते | पाषाणभेद | 0 | |
| आमंत्रण .... | विशाल कुलकर्णी | 2 | |
| गीत: अरे अरे रिक्षावाल्या | पाषाणभेद | 7 | |
| मदवल माया थोली ले.. | राघव | 14 | |
| आपली व्यक्तिपूजा | अभिरत भिरभि-या | 6 | |
| (किमया) | केशवसुमार | 3 | |
| पुन्हा एकदा खाउच! | शानबा५१२ | 1 | |
| गीत: भंगार डबा बाटली आसंल तर देवून टाका | पाषाणभेद | 5 | |
| पुन्हा एकदा पाऊस | स्वप्निल मन | 1 | |
| लावणी: सोन्याची अंगठी मजला आणुन द्या | पाषाणभेद | 11 | |
| “ रात्र यौवनांत ” | निरन्जन वहालेकर | 4 | |
| < पहीलं अॅडव्हेन्चर , पहीलं चुंबन> | शुचि | 47 |