कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| एका स्थळात लिहिली, जी धोरणे सुरेख | केसुरंगा | 21 | |
| किती सुखाचे असेल | क्रान्ति | 16 | |
| मी न माझा……… | निरन्जन वहालेकर | 0 | |
| कव्वाली : अशी ग कशी सोडूनी जाते तू मला | पाषाणभेद | 0 | |
| नाव सुचत नाही. | स्पंदना | 6 | |
| शून्य | sur_nair | 6 | |
| स्वप्नी माझ्या आलीस तू | पाषाणभेद | 0 | |
| सीमालढागीतः भिऊ नको मराठी जना | पाषाणभेद | 5 | |
| काही राहीलेले | पंचम | 5 | |
| गाणी | क्रान्ति | 14 | |
| सद्गुरू माउली | सागरलहरी | 6 | |
| टंकेल वीडंबक जैं न काहीं | धनंजय | 27 | |
| पुन्हा एकदा | jaypal | 9 | |
| मीरा म्हणे ........... | झुम्बर | 2 | |
| (हळूहळू हा तापच झाला स्वैपाक अन्) | राजेश घासकडवी | 7 | |
| महाराष्ट्र कर्नाटक सीमावादावरील गीत : उठ रे मराठी गड्या तू चल सीमेवर | पाषाणभेद | 24 | |
| निवडुंग........ | निरन्जन वहालेकर | 1 | |
| अतरंग ... | विशाल कुलकर्णी | 3 | |
| शिशिर ऋतू का आला हेमंत सरून | पाषाणभेद | 1 | |
| हाच आपला ढंगु आहे... | घाटावरचे भट | 21 |