कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| मंद जाहल्या तारका..... | निरन्जन वहालेकर | 2 | |
| माझ्या अंगामधी भिनलाय वादळी वारा | पाषाणभेद | 0 | |
| (बट डोईवरि बट झुलते तरि) | राजेश घासकडवी | 16 | |
| सभ्यतेची अभिरूची : नागपुरी तडका | गंगाधर मुटे | 25 | |
| ..... बाकी सगळं ठीक आहे ! | मनीषा | 10 | |
| (प्रार्थना) | चतुरंग | 56 | |
| हातचा | स्वाती फडणीस | 9 | |
| माहेराची आटवण येई | पाषाणभेद | 7 | |
| माझे बाबा | पाषाणभेद | 4 | |
| प्रार्थना | यशोधरा | 22 | |
| पाउस आला पाउस आला | पाषाणभेद | 3 | |
| अरे देवा मी काही सुखी नाही | पाषाणभेद | 6 | |
| मी पहात होतो दूर... | भारतीय | 1 | |
| फिनिक्स | निरन्जन वहालेकर | 2 | |
| लावणी : आसं कसं वो तुमी मर्द गडी | पाषाणभेद | 5 | |
| पाध्यांचे मनोगत | नितिन थत्ते | 24 | |
| देवा एक माझे | पुरवावे कोड | | सागरलहरी | 6 | |
| नका जावू अशा पावसात | पाषाणभेद | 4 | |
| नव्या वर्षाची गुढी उभारू चला | पाषाणभेद | 2 | |
| आठवण आणि …… | निरन्जन वहालेकर | 3 |