कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| पाऊस आला | पाषाणभेद | 0 | |
| हा तोच किनारा फिरतो मी | राजेश घासकडवी | 7 | |
| (अवलिया रुप) | केसुरंगा | 16 | |
| (केव्हा तरी पहाटे) | llपुण्याचे पेशवेll | 22 | |
| <अवलियाचे रूप> | परिकथेतील राजकुमार | 28 | |
| पाऊस गाणी | स्वाती फडणीस | 3 | |
| अरूपाचे रूप | क्रान्ति | 14 | |
| लपंडाव | फ्रॅक्चर बंड्या | 8 | |
| ..पाउस | जाई अस्सल कोल्हापुरी | 12 | |
| जुनी | अरुण मनोहर | 5 | |
| पाउस आनि निसर्ग | अनिरुद्धशेटे | 1 | |
| कोणत्या शब्दात दम त्याला भरू ? | केशवसुमार | 9 | |
| तुज्या डोल्यांच गान आयकलच नाय | ब्रिटिश | 31 | |
| कोणत्या मापात मी पेला भरू? | केशवसुमार | 11 | |
| गीत : सूर आज माझे का अबोल झाले | पाषाणभेद | 2 | |
| वारी | राजेश घासकडवी | 20 | |
| विकांताची करमणूक . | रामदास | 14 | |
| आज अचानक तुझी आठवण का यावी | अनिरुद्ध अभ्यंकर | 6 | |
| एका स्थळात लिहिली, वीडंबने हि दोन | राजेश घासकडवी | 21 | |
| एका स्थळात लिहिली, जी धोरणे अनेक | केशवसुमार | 9 |