कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| 'मोगरा' | दिलीपकुमार | 6 | |
| “ म्याच फिक्सिंग “ | निरन्जन वहालेकर | 1 | |
| ' ती ' | दिलीपकुमार | 0 | |
| मित्रार्थ | निमिष सोनार | 0 | |
| ताप | मितभाषी | 3 | |
| मैत्री चिरायु होवो..a.k.a Long Live Friendship | कानडाऊ योगेशु | 2 | |
| अनुभवींनी मार्गदर्शन करावे. | शानबा५१२ | 20 | |
| ती...... | सुभाष् अक्कावार | 3 | |
| <एक पाहुणी पोरगी> | अवलिया | 17 | |
| एक पाहुणी पोरगी ... | वैभव देशमुख | 30 | |
| मातेचे ऋण | शुचि | 8 | |
| कृष्णा तू आमच्या संगे खेळत का नाही? | पाषाणभेद | 1 | |
| रक्त आटते, मन सुक्ते | रणजित चितळे | 2 | |
| (माझी जन्माची शिदोरी ) | अडगळ | 16 | |
| विलास तो गेला, गेला, तिला भेटण्याला | केसुरंगा | 5 | |
| ती स्वप्नसुंदरी | गंगाधर मुटे | 3 | |
| संस्थळी प्रतिसाद देता | शुचि | 15 | |
| अघटीत | निमिष सोनार | 2 | |
| ((बट डोईवरि बट झुलते तरी)) | मराठमोळा | 3 | |
| माझी जन्माची शिदोरी | क्रान्ति | 15 |