कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| जीवन-मृत्यू! | राघव | 4 | |
| (अत्रंग) | अडगळ | 1 | |
| हळूहळू हा तापच झाले संपादन... | केशवसुमार | 7 | |
| अंतरंग | jaypal | 14 | |
| काय बोलणे | सागरलहरी | 3 | |
| शेतकरी गीत : काळ्या काळ्या मातीमधी पिकलंया सोनं | पाषाणभेद | 4 | |
| हळूहळू हा व्यापच झाले संपादन... | केशवसुमार | 11 | |
| माते अंबे भवानी नमितो जिजा-बाई (राजमाता जिजाउंचे पुण्य स्मरण ) | सागरलहरी | 2 | |
| गाणे : असेच असते जीवन कुणाचे, नच तयाला कोणी गणती | पाषाणभेद | 4 | |
| एकदा होवोनी पक्षी | पाषाणभेद | 1 | |
| वादळ वळवाचे | धनंजय | 18 | |
| ही ही तिची गाथा | आनंद घारे | 11 | |
| देवा ढळो नेदी | माझी चित्त वृत्ती | | सागरलहरी | 6 | |
| एक जुना मित्र भेटला .. | सागरलहरी | 7 | |
| गे कविते | सागरलहरी | 12 | |
| शॄंगार | राजेश घासकडवी | 19 | |
| बीज... | शैलेन्द्र | 22 | |
| असच काहीसं | नेहमी आनंदी | 2 | |
| प्रलय | निरन्जन वहालेकर | 2 | |
| उगाच काहितरी | शिल्पा ब | 6 |