कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| छंद | नेहमी आनंदी | 5 | |
| संदेश | राजेश घासकडवी | 15 | |
| कृष्णपिसे | झुम्बर | 3 | |
| (कित्तीदा) | llपुण्याचे पेशवेll | 7 | |
| <अनावर> | सहज | 10 | |
| गाणे : पायी चालतोया पंढरीची वारी | पाषाणभेद | 4 | |
| (अनावर) | अडगळ | 7 | |
| ..रस्ता.. | कानडाऊ योगेशु | 2 | |
| कितीदा..! | विसोबा खेचर | 15 | |
| कुंभारवाडा | राजेश घासकडवी | 22 | |
| (पारध) | अवलिया | 9 | |
| दक्षिणायन.. | विसोबा खेचर | 25 | |
| हाती माझ्या शुन्यच उरले | पाषाणभेद | 2 | |
| पारध | सहज | 24 | |
| वस्ती..! | विसोबा खेचर | 11 | |
| देखावे.. | विसोबा खेचर | 41 | |
| सहज सुचल म्हणुन | jaypal | 13 | |
| गीत: वाटे मज अपार सुख | पाषाणभेद | 0 | |
| आस “ नाविन्याची “ | निरन्जन वहालेकर | 1 | |
| कालू कौआ | सहज | 25 |