कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| ओझं | स्वप्नयोगी | 0 | |
| संसदेच्या शाळेत... | अविनाश ओगले | 13 | |
| झाला तो सत्वर, मॅनेजर! | चतुरंग | 23 | |
| काव्य | स्वप्नयोगी | 0 | |
| एक खट्याळ त्रिवेणी | लिखाळ | 22 | |
| तुझ्या जगात कधी असेन मी,नसेन मी... | नवाब अमोल | 0 | |
| काही क्षण. | जागु | 6 | |
| ( णडू णको ) | टारझन | 20 | |
| जाग | स्वप्नयोगी | 1 | |
| चुकले का हो ? | मूखदूर्बळ | 1 | |
| सोबत | जागु | 8 | |
| प्रतिसाद | श्रीकृष्ण सामंत | 3 | |
| पाऊलखुणा | स्वप्नयोगी | 2 | |
| आकर्षण | जागु | 9 | |
| जास्वंद | वडापाव | 4 | |
| (सोडू नको) | चतुरंग | 22 | |
| एका बेसावध क्षणी | क्रान्ति | 18 | |
| लपाछपी | स्वप्नयोगी | 3 | |
| ती आणि तो . | जागु | 7 | |
| बिंदू | मनीषा | 12 |