कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| मनासारखे | क्रान्ति | 17 | |
| (चंपी) | चतुरंग | 22 | |
| चंपी | शरदिनी | 32 | |
| मोक्ष | विशाल कुलकर्णी | 10 | |
| लडखडगीत | चतुरंग | 4 | |
| गडबडगीत | ॐकार | 7 | |
| जखम | स्वप्नयोगी | 5 | |
| मौन तुझे | क्रान्ति | 6 | |
| (काळजी) | चतुरंग | 6 | |
| प्रतिसाद पाहुनी मी झालो पसार नाही | केशवसुमार | 15 | |
| अर्थ | स्वप्नयोगी | 4 | |
| लिलाव.....! | विशाल कुलकर्णी | 7 | |
| तुझी माझी प्रित | जागु | 9 | |
| जमा खर्च | विशाल कुलकर्णी | 4 | |
| (Bore-kuting हा माझा छंद आहे) | मराठमोळा | 5 | |
| orkuting हा माझा छ॑द आहे | स्वप्निल मन | 3 | |
| जवाबः शहरातला आणि खेड्यातला मुलगा | ३_१४ विक्षिप्त अदिती | 41 | |
| क्षितिज | स्वप्नयोगी | 0 | |
| खेड्यातला आणि शहरी मुलगा | पाषाणभेद | 22 | |
| असा फिरे | क्रान्ति | 9 |