कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| झाड | स्वामि | 13 | |
| या गर्द नील नयनी... दाटुन मेघ आले... | चंद्रशेखर महामुनी | 9 | |
| आलो होतो ! (स्फुटिका) | लिखाळ | 15 | |
| छळतो अजूनही का | जयवी | 18 | |
| कोंबडी भूंकाया लागली | मूखदूर्बळ | 1 | |
| अनोळखी काळ | जागु | 9 | |
| मुक्तक | चन्द्रशेखर गोखले | 5 | |
| ((बेत आहे..!)) | चतुरंग | 12 | |
| कृष्णस्वामिनी.. | प्राजु | 27 | |
| अभिनंदन | क्रान्ति | 13 | |
| ( बेत आहे..! ) | मराठमोळा | 2 | |
| बेत आहे..! | उपटसुंभ | 11 | |
| २ कविता आणि एक टवाळकी..... | उदय सप्रे | 8 | |
| श्रद्धा | जागु | 6 | |
| पायघड्या..... | उदय सप्रे | 5 | |
| राणी..... | उदय सप्रे | 0 | |
| स्फुटक.. | चन्द्रशेखर गोखले | 13 | |
| बळ दे ! | उदय सप्रे | 6 | |
| मुक्तक.. | चन्द्रशेखर गोखले | 5 | |
| मनात लपलेला दु:शासन! | उमेश कोठीकर | 16 |