कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| आसाराम बापु | rahulkransubhe | 8 | |
| प्राणिपात कोटि कोट | सतिश | 63 | |
| लव लेटर | कशिद | 6 | |
| पुढार्यांचे देशभक्ती गीत | चन्द्रशेखर गोखले | 5 | |
| (भणंग २) | चतुरंग | 2 | |
| खेळ खुर्चिचा | मनोज | 3 | |
| अरे पुन्हा आयुष्याच्या.. | बहुगुणी | 1 | |
| सोनियाच्या तालावर महाराष्ट्र वारयावर | कपिल काळे | 4 | |
| झुंज त्याची व्यर्थ गेली | पुष्कराज | 4 | |
| पुरे झाले चंद्र सूर्य! | केदार केसकर | 1 | |
| हिची चाल | भिडू | 7 | |
| पुन्हा जिवंत परत आले तर | सुवर्णमयी | 5 | |
| अजुन मी... | राघव | 4 | |
| असेच काहीतरी | चेतन | 2 | |
| पाहिजे एकांत थोडा | पुष्कराज | 1 | |
| तू दिलेल्या वेदना | जयवी | 7 | |
| "तो"- जागतिक एड्स दिना निमित | sanjubaba | 2 | |
| कसं काय पाटील बरं हाय का | उपटसुंभ | 1 | |
| सुट्टी..! | संदीप चित्रे | 11 | |
| एक जुनी कविता: सहज आठवली म्हणून | अविनाश ओगले | 4 |