कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| गोंधळ | ऋषिकेश | 9 | |
| (काही कविता का प्रश्न ?) | चेतन | 0 | |
| फेसाळत्या सागरतीरी सांज घेते ठाव | कवटी | 1 | |
| सलाम त्या शुराना .....शहिद झालेल्या विराना | ग्रीष्म | 3 | |
| (कधीच का नाही?) | चेतन | 1 | |
| जागो मतदार प्यारे | अनिरुध्द | 0 | |
| स्वागत | मुक्तसुनीत | 4 | |
| (काही कविता) | चतुरंग | 9 | |
| जगायचे जगायचे ! | पल्लवी | 4 | |
| साजणी आली बघ बहार | कवटी | 8 | |
| झोपले हे जग | कवटी | 7 | |
| आकार | द्विज | 7 | |
| लवंगलता एक प्रयत्न | चेतन | 0 | |
| बळी राजा.... | ग्रीष्म | 1 | |
| काही कविता. | रामदास | 31 | |
| हे नाक तुंबलेले (विडंबन) | सागरलहरी | 1 | |
| कष्ट करणार्या " तिला " | दत्ता काळे | 2 | |
| हि कार! | केसुरंगा | 1 | |
| --- ओढ वादळी ...(सवंगलता छंद) --- | केशवटुकार | 5 | |
| ओढ वादळी ...(लवंगलता छंद) | मनीषा | 3 |