कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| झोका... | प्राजु | 26 | |
| संवेदना!! | स्वाती फडणीस | 12 | |
| अपवाद | पॅपिलॉन | 10 | |
| चारवांतर | परिकथेतील राजकुमार | 6 | |
| वाटसरूच्या पाऊलखुणा (अनुवादित) | धनंजय | 22 | |
| (भासमान) | चतुरंग | 12 | |
| भासमान | पॅपिलॉन | 6 | |
| सहज भेट्ली---- | पुष्कराज | 2 | |
| खेळ दोन ओळींचा - ३ | राघव | 40 | |
| घायाळ हरिणी | राजा | 0 | |
| माझा गाव | लवंगी | 7 | |
| बुद्धी (उद्धव मात्रावृत्त प्रयत्न) | ऋषिकेश | 10 | |
| जागतिक मंदी | राजा | 1 | |
| एक रुबाई किंवा चारोळी | दत्ता काळे | 13 | |
| असचं वाटलं म्हणुन| | केदार केसकर | 10 | |
| `अण्णा'न्न दशा! | आपला अभिजित | 5 | |
| बापू.. | उपटसुंभ | 10 | |
| सांगून जा ... | मनीषा | 11 | |
| पुन्हा पहिल्या सारखं | rahulkransubhe | 0 | |
| आई कसे म्हणु मी... | rahulkransubhe | 0 |