कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| मैत्री! | चलत मुसाफिर | 1 | |
| उंटावरल्या प्रा.डॉ. दा.ता. | माहितगार | 22 | |
| आला रे आला कोरोना आला | खिलजि | 3 | |
| असुनी स्वत:च पाशी | संदीप-लेले | 6 | |
| तुलाही,मलाही | अविनाशकुलकर्णी | 2 | |
| क्लीओपात्रा | अविनाशकुलकर्णी | 3 | |
| कोरोना गो, गो कोरोना; साहेब म्हटले कोरोनाला | पाषाणभेद | 4 | |
| COVID19 च्या नावानं बो बो बो बो | अनन्त्_यात्री | 3 | |
| होळी | अविनाशकुलकर्णी | 0 | |
| वुई मीस 'यू'! | माहितगार | 3 | |
| का चाफा म्लान पडला | अविनाशकुलकर्णी | 4 | |
| अपुर्ण | अविनाशकुलकर्णी | 4 | |
| ती संध्याकाळ | माहितगार | 2 | |
| राधाकृष्ण प्रणय प्रितीचे गीत | माहितगार | 2 | |
| तारुण्य पुन्हा जगताना | माहितगार | 5 | |
| तुला बापू म्हणू की बाप्या ? | माहितगार | 6 | |
| ज्ञानोबांस नंब्र विनंती | अनन्त्_यात्री | 12 | |
| एक चांदणी माझ्या घरात डोकावते | चांदणे संदीप | 7 | |
| धर्म इथे बेताल झाला | खिलजि | 2 | |
| (कितनी राते....) | ज्ञानोबाचे पैजार | 4 |