कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| कविकल्पना | Rohini Mansukh | 1 | |
| जयदेव जयदेव जय श्री ख्रिसमसट्री देवा | माहितगार | 4 | |
| (गंमत केली" म्हणालास तू) | ज्ञानोबाचे पैजार | 9 | |
| (कपाळ)मोक्ष!! :-) | चलत मुसाफिर | 19 | |
| "गंमत केली" म्हणालास तू... | प्राची अश्विनी | 21 | |
| उडता मुका, जरी असला सुका | खिलजि | 6 | |
| अन रात झाली शाम्भवी | खिलजि | 15 | |
| (सूरनळीचे उपयोग) | ज्ञानोबाचे पैजार | 8 | |
| बटाट्याचे उपयोग | पाषाणभेद | 3 | |
| माहेर, सासर | पाषाणभेद | 1 | |
| अहो डॉक्टर, काढा वेंटीलेटर | पाषाणभेद | 7 | |
| क्लीनचीट ची फॅक्टरी | बाजीगर | 3 | |
| कव्वाली: तुला पाहिले की | पाषाणभेद | 0 | |
| दुर्वास | निराकार गाढव | 8 | |
| दूष्काळ झळा... | गणेशा | 12 | |
| ती सर ओघळता.. | आनंदमयी | 1 | |
| देव मानीत नाहीत मंदिराचे कर्मचारी ।। | बाजीगर | 11 | |
| मेळघाट ... | गणेशा | 8 | |
| त्याचं दु:ख… | मनिष | 9 | |
| ना देवेंद्र देव इथे , ना उद्धव आहे साव | खिलजि | 6 |