कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| संध्याकाळी तू गंगेतीरी | शिव कन्या | 4 | |
| शब्द | अनन्त्_यात्री | 8 | |
| ओठात दाटलेले... | निलेश दे | 2 | |
| प्रिये मी मोर झालो तुझ्यासाठी | खिलजि | 3 | |
| काण्याला सुंदरी मिळाली देवाघरी | खिलजि | 2 | |
| शोक कुणाला? खंत कुणाला? | शिव कन्या | 2 | |
| जन्माष्टमी२.* | शेखरमोघे | 0 | |
| कृष्णजन्म | मायमराठी | 4 | |
| महापूर | बी.डी.वायळ | 5 | |
| स्वरराधा | प्राची अश्विनी | 9 | |
| श्रावणसरी | मायमराठी | 10 | |
| देवघर | शिव कन्या | 19 | |
| अश्वत्थामा | मायमराठी | 1 | |
| (रगेल पावट्याचे मनोगत) | नाखु | 7 | |
| राखी. | प्राची अश्विनी | 6 | |
| आसिंधू | मृणालिनी | 5 | |
| कविता: बिबट्याचे मनोगत | bhagwatblog | 6 | |
| ३३ कोटींची मुक्ती | मायमराठी | 3 | |
| धुरंधर | खिलजि | 7 | |
| वाळूचे विरहगीत | मायमराठी | 10 |